साल का अंतिम सूर्यग्रहण, ऐसे दिखाई देगा सूरज, पढ़ें ग्रहण से जुड़ी जानकारी

साल 2019 के खत्म होने के कुछ दिन पहले सूर्यग्रहण लगेगा। यह ग्रहण वलयाकार होगा यानि ग्रहण के दौरान सूर्य एक चमकदार छल्ले के रूप में दिखाई देगा। सूर्यग्रहण भारत में दिखाई देगा खासतौर पर दक्षिण भारत में बेहतर तरीके से देखा जा सकेगा। ग्रहण 26 दिसंबर को सुबह लगभग 8 से शुरू हो जाएगा जो 10 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। पूर्ण सूर्य ग्रहण 1 बजकर 36 मिनट तक खत्म हो जाएगा। आइए जानते हैं ग्रहण की खास बातें।

  • यह सूर्य ग्रहण दक्षिण भारत में सबसे बेहतर तरीके से देखा जा सकेगा।
  • ग्रहण के दौरान सूर्य एक चमकदार रिंग की तरह दिखाई देगा।
  • सूतक काल 25 दिसंबर की रात 8 बजे से ही शुरू हो जाएगा।
  • पूर्ण सूर्यग्रहण 18 माह में एक बार ही दिखाई देता है।
  • जब सूर्य ग्रहण चरम पर होता है, तब पृथ्वी पर चंद्रमा की एक गोलाकार छवि बनती है।
  • सूर्यग्रहण के वक्त पृथ्वी के ध्रुवों पर चंद्रमा की परछाईं 5000 मील प्रति घंटा की रफ्तार से चलती है।
  • पृथ्वी पर पड़ने वाली परछाईं की अधिकतम चौड़ाई 167 मील हो सकती है, इससे अधिक नहीं हो सकती।
  • सूर्यग्रहण के वक्त पृथ्वी पर चंद्रमा की परछाईं पड़ती है, जो 1100 मील प्रति घंटा की रफ्तार से इक्वेटर पर चलती है।
  • उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव से केवल आंशिक सूर्य ग्रहण ही दिख सकता है, पूर्ण सूर्य ग्रहण यहां से कभी नहीं दिख सकता है।

1) सूर्यग्रहण के ज्योतिष महत्व की खास बातें:

  • वृद्धि योग और मूल नक्षत्र में सूर्यग्रहण
  • गुरुवार और अमावस्या का संयोग
  • धनु राशि में 6 ग्रह एक साथ
  • ग्रहण की अवधि 3.30 घंटे
  • भारत में सूर्यग्रहण सुबह 8.04 बजे
  • सूतक काल- 25 दिसंबर शाम करीब 05.15 बजे से शुरू

2) ग्रहण का राशियों पर असर:

शुभ- कर्क, तुला, कुंभ और मीन राशि पर शुभ असर
अशुभ- मेष, वृष, मिथुन, सिंह, कन्या, वृश्चिक, धनु और मकर

3) भारत में सूर्य ग्रहण- 26 दिसंबर 2019:

26 दिसंबर 2019 को भारत में सूर्य ग्रहण देखने को मिलेगा। इस ग्रहण की शुरुआत सुबह 8.17 बजे होगी और 10.57 बजे सूर्य ग्रहण खत्म होगा। ग्रहण सुबह 9.30 बजे अपने चरम पर होगा। यह साल का तीसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण होगा। दक्षिण भारत में रहने वाले इसे ज्यादा स्पष्ट देख पाएंगे। खासतौर पर कन्नूर, कोझीकोड, मदुरै और त्रिशूर क्षेत्र में ये साफ नजर आएगा।

4) सूर्य ग्रहण का वैज्ञानिक तथ्य:

ग्रहण को लेकर कई मिथक हैं लेकिन इसके कई वैज्ञानिक तथ्य भी हैं। सूर्यग्रहण के बारे में वैज्ञानिकों का कहना है कि इस अवधि के दौरान पृथ्वी के उत्तरी एवं दक्षिणी ध्रुव प्रभावित होते हैं। यह अवधि ऋणात्मक मानी जाती है। ग्रहण के दौरान सूर्य से निगेटिव विकिरण यानी रेडिएशंस निकलती हैं। इसलिए नंगी आंखों से देखने के लिए मना किया जाता है ।

5) क्या हैं ग्रहण से जुड़े मिथक:

भारत में तो ग्रहण को लेकर काफी मिथक भी जुड़े हैं। ज्योतिष के अनुसार जहां ग्रहण शुरू होने के पहले ही मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं वहीं गर्भवती महिलाओं और बच्चों को भी इसके सीधे संपर्क में आने की मनाही होती है।

6) क्यों लगता है सूर्य ग्रहण:

ग्रहण एक खगोलीय घटना है। जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं तो ग्रहण लगता है। जब सूर्य और पृथ्वी के बीच जैसे ही चंद्रमा आता है तब इसे सूर्य ग्रहण कहा जाता है। सूर्य ग्रहण तीन तरह का होता है। पूर्ण सूर्य ग्रहण, आंशिक सूर्य ग्रहण और वलयाकार सूर्य ग्रहण। हिंदू पंचांग के अनुसार ग्रहण की यह घटना हमेशा अमावस्या के दिन ही होती है।
a. पूर्ण सूर्यग्रहण
पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य और पृथ्वी के बीच में चंद्रमा आ जाता है और इसका प्रकाश पूरी तरह से धरती पर नहीं पहुंच पाता है और पृथ्वी पर अंधकार की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इस प्रकार बनने वाला ग्रहण को पूर्ण सूर्यग्रहण कहते हैं।
b. आंशिक
आंशिक सूर्यग्रहण के दौरान चंद्रमा, सूर्य के केवल कुछ भाग को ही अपनी छाया में ले पाता है। इससे सूर्य का कुछ भाग ग्रहण ग्रास में तथा कुछ भाग ग्रहण से अप्रभावित रहता है। इस प्रक्रिया को आंशिक सूर्यग्रहण कहा जाता है।
c. वलय
अंतिम प्रकार का सूर्य ग्रहण “वलय सूर्यग्रहण” के नाम से जाना जाता है। इसमें चंद्रमा सूर्य को इस प्रकार से ढकता है कि सूर्य का केवल मध्य भाग ही छाया क्षेत्र में आता है। सूर्य के बाहर का क्षेत्र प्रकाशित होने के कारण वलय सूर्यग्रहण एक चमकदार अंगूठी के प्रतीत होता है।

7) ग्रहण के दौरान इन बातों का रखें ध्यान:

  • ग्रहण के वक्त किसी को भी पूजा पाठ नहीं करना चाहिए।
  • खाने पीनें की चीजें में तुलसी का पत्ता डालकर रख दें।
  • ग्रहण के खत्म होने के बाद ही पूरे घर की सफाई करनी चाहिए।
  • ग्रहण के समय खाना ना बनाए और ना ही खाएं।
  • गर्भवती महिलाओं को सूर्यग्रहण के दौरान खास ध्यान रखना चाहिए।
  • ग्रहण के दौरान सिर पर तेल लगाना वर्जित होता है।
  • ग्रहण के दौरान वायुमंडल में बैक्टीरिया और संक्रमण का प्रकोप तेजी से बढ़ जाता है। ऐसे में भोजन करने से संक्रमण अधिक होने की आशंका रहती है।
  • ग्रहण के समय पति और पत्नी को शारीरिक संबंध किसी भी कीमत पर नहीं बनाना चाहिए। इस दौरान यदि गर्भ ठहर गया तो संतान विकलांग तक या मानसिक रूप से विक्षिप्त तक हो सकती है।
  • ग्रहण के समय कोई भी शुभ व नया कार्य शुरू नहीं करना चाहिए।

# भारत के अलावा इन देशों में दिखेगा सूर्यग्रहण:

सूर्य ग्रहण भारत के अलावा पूर्वी यूरोप, एशिया, ऑस्ट्रेलिया और पूर्वी अफ्रीका में काफी साफ दिखाई देगा। इसके साथ-साथ अफगानिस्तान, पाकिस्तान और चीन में भी सूर्य ग्रहण प्रभावी रूप से देखा जा सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *